सिर दर्द किन किन वजह से होता है



                            सिरदर्द

                       
सिर दर्द किन किन वजह से होता है

रोग परिचय, कारण व लक्षण


यह कोई स्वतन्त्र रोग न हो कर किसी अन्य रोग/कारण का एक 

लक्षण मात्र है । मस्तिष्क में वेदना नहीं होती, केवल कपाल के बाहर 

मानव में, कपाल के Periostium में आर्टरी में तथा कपाल के भीतर

 Venous Sinuses में Dura में, मस्तिष्क गत आर्टरीज 

(Arteries) में, पञ्चम नाड़ी, Trigeminal, नवम 

Glossopharyngeal एवं दशम् Vagus नाड़ी में 'संज्ञा' की 

प्रतीति है। इन्हीं कारण Dura व Menenges में वेदना (Pain) 

की प्रतीति होती है। कपालान्तर्गत धमनियों में रक्त के अधिक भर 

जाने तथा उनके फैल जाने और उनके प्रबल स्पंदन से अथवा उनमें रक्तभार (ब्लड प्रेशर) के भार के जाने यानि एक्सटर्नल कैरोटिड 

आर्टरी की शाखाओं के फैल जाने से तथा कपाल के भीतर दबाव 

के बढ़ जाने से प्रायः सिर दर्द हुआ करता है, यथा विषम जवर, 

मन्थर ज्वर (इन्फ्लूएञ्जा), मसूरिया आदि में होता है। झुकने से 

रक्त भार जनिक सिर दर्द में वृद्धि होती है। 

सामान्य: रक्त में जीवाणु हों, कोई विष द्रव्य हो (Spesis) हो तो सिरदर्द हो जाता है। 

अर्थात ज्वरों का सिरदर्द मस्तिष्क वरणगत धमनियों के फैल जाने 

अथवा भर जाने से होता है। यहाँ यह बात भी विशेष स्मरणीय है

 कि-Tentorium के नीचे के भाग में, रक्तभार बढ़े तो-पश्चिम 

कपाल के भीतर और बाहर दोनों ओर (Upper Cervical 

Spinal Nervous) के व्याप्त होने के कारण दर्द सिर के पिछले

 भाग में प्रतीत होता है। रक्तभार, Tentorium (मस्तिष्क की 

टैण्ट सदृश रचना) के ऊपर के भाग में बढ़े तो ऊपर के कपाल के 

भीतर-बाहर, दोनों ओर 5वीं नाड़ी की तीसरी शाखा के व्याप्त होने

 से दर्द-अग्र कपाल तथा शंख प्रदेशों पर प्रतीत होता है। इसी 

प्रकार कोई शिरा प्रसारक (वासोडाई लेटर) औषधि (यथा-नाइट्रेट)

 अधिक मात्रा में लिया जाये तो भी सिर दर्द हो जाता है। शरीर में 

हिस्टामीन के बढ़ जाने अथवा किसी बाहरी व प्रतिकूल प्रोटीन के 

शरीर में आ जाने से मस्तिष्क के आवरणों (Pia व Dura) की 

धमनियों के शिथिल होकर फैल जाने, मस्तिष्क के अन्तर्गत 

रक्तभार (B.P)

के बढ़ने से भी सिर दर्द हो जाता है। क्रोध आदि के

तीव्र मानसिक आवेश से-कपालान्तर्गत धमनियों में शैथिल्य 

(Dialatation) होकर सिर दर्द होता है। दूसरी ओर चिन्ता आदि

 मानसिक आवेशों के कारण चेहरे व कपाल की मांसपेशियों में

 तनाव (टेन्शन-Tension) के बढ़ जाने से तथा वहाँ रक्त के कम 

पहुँचने से भी सिरदर्द रहता है, जो पिछले भाग में विशेष होता है। 

(Occipital होता है।)


रक्तभार (B.P) के बढ़ जाने के अतिरिक्त रक्तभार के गिर जाने से 

मस्तिष्क को रक्त और ऑक्सीजन के कम मिलने से भी (यथा-पाण्डु रोग में) सिर दर्द हो जाता है। अनिद्रा (इन सोमनियां) से भी

 सिर दर्द हो जाता है। रक्त में किसी असामान्य विष के आ जाने से

 भी-(यथा Co, Co,) अथवा चिरस्थायी वृक्क रोग जनित मूत्र विष

 (यूरेमिया) से अथवा मलबन्ध व अजीर्ण जनित किसी विष के 

कारण एवं किसी दूसरे 'मेटाबोलिक' के बढ़ जाने अथवा रक्त में 

खाण्ड के बढ़ जाने से भी सिरदर्द हो जाता है। कुछ मस्तिष्क रोगों 

(यथा-मस्तिष्क का व्रण शोथ, मेनिनजाइटिस), मस्तिष्क, अर्बुद, 

मस्तिष्क विद्रधि, मस्तिष्क में जलवृद्धि (हाइड्रोसेफालस), मस्तिष्क

 में आर्टिस्केलोरोसिस थ्राम्बेसिस एवं मस्तिष्क के 

Subarachnoid

प्रदेश में-रक्तस्राव हो जाने से भी सिर में 

भारीदर्द होता है। इनके अतिरिक्त नेत्र के Iritis, Glaucoma, 

Eye Strain अथवा Hypermetropia रोगों, तथा कान, 

नाक (पर हसुल Sinuses) गले, दर्द आदि के-रोगों के कारण भी 

सिर दर्द होता है। नाक व आँख के भीतर के वेदना वाहक सूत्र 5वीं 

मस्तिष्क नाड़ी की प्रथम द्वितीय शाखाओं द्वारा ऊपर की ओर 

जाते हैं। इन्हीं से मस्तिष्क की त्वचा को भी सूत्र आते हैं, जिससे 

इनमें होने वाला दर्द-मस्तिष्क में प्रतीत होता है। सबसे अधिक 

सुलभ सिरदर्द-तनाव (टेन्शन) के कारण होता है। कहने का तात्पर्य

यह है कि 'मानसिक' होता है



 रोग/कष्ट के प्रमुख कारण


मस्तिष्क रोग।


•मस्तिष्क में -रक्त पहुंचाने वाली रक्तवाहिनियों के रोग। चोट लग जाने के बाद।


• आँख, कान, दाँत, एवं गर्दन के रोगों में।


•ज्वर-मलेरिया, टाइफाइड, फ्लू आदि में।


•सार्वदैहिक रोग (यथा-अम्लपित्त (एसिडिटी), कब्ज, मूत्र विषमता (यूरेमिया)।


•मानसिक रोग तथा हिस्टेरिया।


• बन्द कमरे में (जिनमें शुद्ध हवा को आवागमन न हो)। आँखों की टेन्शन का बढ़ना तथा रोशनी कम होना।


•अधिक ऊँचाई वाले स्थान पर यात्रा करने से।


•सिर पर बाह्य दबाव पड़ने से।


•स्त्रियों में-मासिक धर्म के समय, मासिक धर्म से पूर्व तनाव में, रजोनिवृत्ति काल' में।


•कुछ औषधियों-(तथा मार्फिन, कुनैन, तम्बाकू, अल्कोहल आदि) अधिक मात्रामें लेने/सेवन करने से।


प्रमुख लक्षण


अनिद्रा (रोगी को नींद नहीं आती है।)


•सिर में निरन्तर दर्द अथवा रूक-रूक कर तेज दर्द होना।


•बेचैनी बनी रहना।


•जी घबराना, मिचली व उल्टियां (वमन) आना। वायु (गैस) व अधिक रक्तचाप वाले रोगियों के सिर में भारीपन बना रहता है।


•तनाव (टेन्शन) से उत्पन्न सिरदर्द में जकड़न अनुभव होती है।


•चिन्ता,

क्रोध, मानसिक कारणों से भी सिरदर्द बना रहता है।


•मासिक धर्म में, आर्तव की अनियमितता में-रोगी/स्त्री को हल्का-हल्का सिरदर्द बना रहता है।


•मस्तिष्क/आवरण शोथ, फ्लू एवं अन्य विषमताओं में सिर दर्द तेज होता है।

 • ज्वरों, मदात्यय (अल्कोहोलिज्म), सिर की चोट मस्तिष्कवरण के नीचे रक्त


•स्राव व लम्बर पंक्चर में सिरदर्द तीव्र स्वरूप का तथा अचानक होता है।


जांच/निदान


सिरदर्द के साथ-स्मृति नाश, शिरोभ्रम, सिनकोप (Syncope) स्वल्प मूर्च्छा के भी लक्षण हों तो-मस्तिष्क में आर्टरी स्केलोरोसिस (Arterioselerosis) का निश्चय करें। 

• ज्वर, आक्षेप तथा खण्ड कुब्जता के लक्षण हों तो-मैनिन 

जाईटिस

(Meningi-tis) का सन्देह करें। रक्तभार से सिरदर्द हो 

तो-झुकने तथा क्रोध करने से बढ़ता है तथा सुबह (प्रात:काल)

 विशेष होता है।


•जो सिर दर्द औषधियों से ठीक न हो एवं तीव्र हो तो-मस्तिष्काबुर्द 

का सन्देह करना चाहिए। अर्बुद का दर्द-प्रायः प्रातः काल होता है। 

खांसने, झुकने, जोर लगाने से जब सिर में प्रेशर बढ़ता है तब

 बढ़ता है अर्थात लेटने पर बढ़ता है।




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